| ای یار مرا غم تو یارست | عشق تو ز عالم اختیارست | |
| با عشق تو غم همی گسارم | عشق تو غمست و غمگسارست | |
| جان و جگرم بسوخت هجران | خود عادت دل نه زین شمارست | |
| جان سوختن و جگر خلیدن | هجران ترا کمینه کارست | |
| در هجر ز درد بیقرارم | کان درد هنوز برقرارست | |
| ای راحت جان من فرج ده | زان درد که نامش انتظارست | |
| در تاب شدی که گفتم از تو | جز درد مرا چه یادگارست |