| با رقیب آمدی به محفل من | برق غیرت زدی به حاصل من | |
| جان به آسانی از غمت دادم | وز تو آسان نگشت مشکل من | |
| جانم از تن سفر نمیکردی | گر نمیرفتی از مقابل من | |
| کینم انداختند در دل تو | مهرت آمیخت در دل من | |
| تشنهی آب زندگی بودم | خاک میخانه گشت منزل من | |
| شوق زخم دگر به جان دارد | دل مجروح نیم بسمل من | |
| خنجری زد به سینهام قاتل | که فزون ساخت حسرت دل من | |
| قابل تیغ او شدم آخر | کار خود کرد بخت مقبل من | |
| میدهد جان فروغی از سر شوق | هر که بیند جمال قاتل من |